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Sunday, August 1, 2021

षड्यंत्र कर पहले जमीन अपने नाम पर चढ़ाया फिर मस्तुरी तहसीलदार के खिलाफ झूठा आरोप,जमीन फर्जीवाड़ा का हुआ खुलासा..

रूपचंद रॉय मस्तूरी

षड्यंत्र कर पहले जमीन अपने नाम पर चढ़ाया फिर मस्तुरी तहसीलदार के खिलाफ झूठा आरोप,जमीन फर्जीवाड़ा का हुआ खुलासा

०० पचपेड़ी के खसरा नम्बर 62/2 को भूमिस्वामी बता रहे अपना जबकि वर्ष 2019 में कर चुका है बिक्री

०० तत्कालीन तहसीलदार व एसडीएम से मिलीभगत कर भूमिस्वामी ने षड्यंत्रपूर्वक बिक्री जमीन को पुन: अपने नाम पर चढ़ाया

०० वर्तमान तहसीलदार को बदनाम करने की नियत से रचा जा रहा प्रोपेगंडा

बिलासपुर – जिला मुख्यालय से 20 किमी की दूरी पर तहसील मुख्यालय मस्तुरी के पचपेड़ी में स्थित खसरा नम्बर 62/2 की भूमि पर अपना अधिकार बता स्वयंभू भूस्वामी बने भूषण प्रसाद मधुकर द्वारा वर्तमान तहसीलदार पर झूठा आरोप लगा कर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है जबकि उक्त जमीन पर वर्षो से काबिज कब्जाधारीयो को हटाकर जमीन पर अपना हक़ जताने वाले स्वयंभू भूस्वामी भुषण मधुकर द्वारा षड्यंत्र कर जमीन को फर्जी तरीके से अपने नाम पर दर्ज कराया है|

मस्तुरी तहसील के ग्राम पचपेड़ी के खसरा नंबर 62/2 को भूषण प्रसाद मधुकर पिता डेरहा द्वारा 18 फरवरी 2019 को त्रिनोज कुमार कुर्रे पिता सेवा राम कुर्रे को बिक्री कर चूका है, लेकिन भूषण प्रसाद मधुकर द्वारा पूर्व तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल एवं पूर्व एसडीएम द्वारा मिलीभगत कर पुन: उक्त खसरे की भूमि को भूषण प्रसाद मधुकर पिता डेरहा के नाम पर दर्ज करा दिया| इस मामले में अपील लगाई गई जिसमे तत्कालीन एसडीएम मोनिका वर्मा ने भूषण प्रसाद मधुकर से लेनदेन कर अपील खारिज कर दिया व धारा 250 का केस लगा दिया जबकि उक्त जमीन पर पूर्व से ही मकान व दुकाने बनी हुई है जिसकी तस्दीक पटवारी प्रतिवेदन में भी मिलता है जिसमे पटवारी द्वारा साफ़ साफ़ लिखा गया है कि 25 से 30 वर्षो से पक्का मकान व व्यवसायिक दुकानों का उपयोग किया जा रहा है जिसके बाद पटवारी के प्रतिवेदन के आधार पर एसडीएम के द्वारा लगाए गए धारा 250 स्वत: ही ख़ारिज हो गया| इस जमीन के मामले में भूषण प्रसाद मधुकर द्वारा अपने कथन में भी यह स्पस्ट रूप से कहा है कि उक्त जमीन पर पिछले 25 वर्षो से लोगो का कब्ज़ा है जबकि धारा 250 में साफ़ साफ़ कहा गया है कि 12 वर्ष से कम समय तक काबिज लोगो को हटाए जाने का प्रावधान निहित है लेकिन उक्त जमीन पर पिछले 25 से 30 वर्षो से लोगो का कब्ज़ा है, उक्त खसरा भूमि के अधिकार अभिलेख व निस्तार पत्रक में छोटे झाड़ का जंगल निहित है|

“पूर्व नायाब तहसीलदार शेषणनारायन जायसवाल एवं पूर्व एसडीएम के द्वारा मिलीभगत कर भूषण मधुकर खसरा नंबर 62/2 को 18 फरवरी 2019 को त्रिनोज कुमार कुर्रे पिता सेवा राम कुर्रे को बिक्री कर चुका हैं, जिसके द्वारा वर्तमान तहसीलदार के ऊपर झूठे आरोप लगा रहा हैं, जबकि जायसवाल के कार्यकाल के दौरान भूषण मधुकर के द्वारा बिक्री किया जा चुका हैं”|

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रूपचंद रॉय मस्तूरी

षड्यंत्र कर पहले जमीन अपने नाम पर चढ़ाया फिर मस्तुरी तहसीलदार के खिलाफ झूठा आरोप,जमीन फर्जीवाड़ा का हुआ खुलासा

०० पचपेड़ी के खसरा नम्बर 62/2 को भूमिस्वामी बता रहे अपना जबकि वर्ष 2019 में कर चुका है बिक्री

०० तत्कालीन तहसीलदार व एसडीएम से मिलीभगत कर भूमिस्वामी ने षड्यंत्रपूर्वक बिक्री जमीन को पुन: अपने नाम पर चढ़ाया

०० वर्तमान तहसीलदार को बदनाम करने की नियत से रचा जा रहा प्रोपेगंडा

बिलासपुर – जिला मुख्यालय से 20 किमी की दूरी पर तहसील मुख्यालय मस्तुरी के पचपेड़ी में स्थित खसरा नम्बर 62/2 की भूमि पर अपना अधिकार बता स्वयंभू भूस्वामी बने भूषण प्रसाद मधुकर द्वारा वर्तमान तहसीलदार पर झूठा आरोप लगा कर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है जबकि उक्त जमीन पर वर्षो से काबिज कब्जाधारीयो को हटाकर जमीन पर अपना हक़ जताने वाले स्वयंभू भूस्वामी भुषण मधुकर द्वारा षड्यंत्र कर जमीन को फर्जी तरीके से अपने नाम पर दर्ज कराया है|

मस्तुरी तहसील के ग्राम पचपेड़ी के खसरा नंबर 62/2 को भूषण प्रसाद मधुकर पिता डेरहा द्वारा 18 फरवरी 2019 को त्रिनोज कुमार कुर्रे पिता सेवा राम कुर्रे को बिक्री कर चूका है, लेकिन भूषण प्रसाद मधुकर द्वारा पूर्व तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल एवं पूर्व एसडीएम द्वारा मिलीभगत कर पुन: उक्त खसरे की भूमि को भूषण प्रसाद मधुकर पिता डेरहा के नाम पर दर्ज करा दिया| इस मामले में अपील लगाई गई जिसमे तत्कालीन एसडीएम मोनिका वर्मा ने भूषण प्रसाद मधुकर से लेनदेन कर अपील खारिज कर दिया व धारा 250 का केस लगा दिया जबकि उक्त जमीन पर पूर्व से ही मकान व दुकाने बनी हुई है जिसकी तस्दीक पटवारी प्रतिवेदन में भी मिलता है जिसमे पटवारी द्वारा साफ़ साफ़ लिखा गया है कि 25 से 30 वर्षो से पक्का मकान व व्यवसायिक दुकानों का उपयोग किया जा रहा है जिसके बाद पटवारी के प्रतिवेदन के आधार पर एसडीएम के द्वारा लगाए गए धारा 250 स्वत: ही ख़ारिज हो गया| इस जमीन के मामले में भूषण प्रसाद मधुकर द्वारा अपने कथन में भी यह स्पस्ट रूप से कहा है कि उक्त जमीन पर पिछले 25 वर्षो से लोगो का कब्ज़ा है जबकि धारा 250 में साफ़ साफ़ कहा गया है कि 12 वर्ष से कम समय तक काबिज लोगो को हटाए जाने का प्रावधान निहित है लेकिन उक्त जमीन पर पिछले 25 से 30 वर्षो से लोगो का कब्ज़ा है, उक्त खसरा भूमि के अधिकार अभिलेख व निस्तार पत्रक में छोटे झाड़ का जंगल निहित है|

“पूर्व नायाब तहसीलदार शेषणनारायन जायसवाल एवं पूर्व एसडीएम के द्वारा मिलीभगत कर भूषण मधुकर खसरा नंबर 62/2 को 18 फरवरी 2019 को त्रिनोज कुमार कुर्रे पिता सेवा राम कुर्रे को बिक्री कर चुका हैं, जिसके द्वारा वर्तमान तहसीलदार के ऊपर झूठे आरोप लगा रहा हैं, जबकि जायसवाल के कार्यकाल के दौरान भूषण मधुकर के द्वारा बिक्री किया जा चुका हैं”|